रिश्ता एक ऐसी बुनियाद है जो सारे संसार को बाधे हुए है ......................कभी इन रिश्तो को बचाए रखने के लिए नए रिश्ते बनाने पडते है , तो कभी इन्ही रिश्तो के लिए कुछ रिश्ते भुलाने भी पडते है .रिश्ता भगवन से उसके भक्त का भी होता है तो मालिक से उसके कुत्ते का भी . अगर ध्यान से देखा जाय तो भले ही कवि हृदय भाउक लोग बुरा मान जाए लेकिन ए तो सत्य है कि बिना स्वर्थ और आवश्यक्ता के रिश्ते न तो बनते है और न ही निभते है .
हा कुछ हद तक उन्हे ढोया जरूर जा सकता है .
Rishta a Bond
हा कुछ हद तक उन्हे ढोया जरूर जा सकता है .
Rishta a Bond
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